DC (2026): पीड़ा से जन्मी प्रतिरोध और प्रतिशोध की कहानी
दो प्रश्न हैं—पहला, हिंसा आदमी कब चुनता है? और दूसरा, क्या आदमी हिंसा शौक से चुनता है? पहले प्रश्न के उत्तर और दूसरे प्रश्न के उत्तर में साम्य है, इसलिए दोनों को साथ में रखा गया है। यह जगजाहिर है कि हिंसा का जवाब हिंसा नहीं होता लेकिन आदमी जब किसी हिंसा का शिकार बनता है, तब उसके भीतर भी वही हिंसा जन्म लेने लगती है। उसके भीतर जमा हुआ दर्द, आक्रोश और प्रतिशोध की भावना धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बनने लगती है। तब वह शौक से नहीं, बल्कि परिस्थितियों से बाध्य होकर हिंसा की तरफ रुख करता है। हालाँकि, हिंसा को समझने और उसके कारणों को पहचानने का अर्थ उसे उचित ठहराना नहीं है। DC फिल्म का मुख्य पात्र देवदास इसी जटिल मनःस्थिति का प्रतिनिधित्व करता है। देवदास बचपन में ही हिंसा की वजह से अपनी माँ को खो चुका है। बचपन में मिली यह चोट उसके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। शायद यही वजह है कि वह किसी भी माँ के दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पाता। जब भी किसी स्त्री या माँ पर अत्याचार होता है, उसके भीतर का पुराना घाव फिर से हरा हो उठता है। वह हर संभव उनकी सहायता करने की कोशिश करता है। अत्याचार के खिला...