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दृश्यम-3 : कहानी सुनने से ज्यादा कहानी कौन सुना रहा है, उस पर ध्यान देना चाहिए

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 ‘परिवार ’—एक ऐसी पारिभाषिक शब्दावली, जिसके भीतर पूरा समाज और पूरी दुनिया समा सकती है। क्योंकि समाज हो या दुनिया, उसकी शुरुआत परिवार से ही होती है। परिवार का महत्त्व क्या होता है, यह उन अनाथालयों में रहने वाले बच्चों से पूछा जाना चाहिए, जिन्हें जन्म तो मिला, लेकिन परिवार नहीं मिला। उनके लिए वही अनाथालय उनका परिवार बन जाता है। शायद यही कारण है कि कोई भी व्यक्ति अपने परिवार पर आँच नहीं आने देना चाहता और आवश्यकता पड़ने पर उसकी रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हो जाता है। विजय सालगांवकर भी ऐसा ही एक चरित्र है। जो  ‘दृश्यम’  नामक फिल्म का मुख्य पात्र है। दृश्यम जोकि तीन भाग में हमारे सामने प्रस्तुत है, अगर  इसकी पूरी कहानी को यदि किसी एक शब्द में समेटना हो तो वह शब्द शायद ‘परिवार’ ही होगा। अजय देवगन द्वारा निभाया गया विजय सालगांवकर पहले भाग से ही अपने परिवार को बचाने के लिए परिस्थितियों से लड़ता दिखाई देता है। वह परिस्थितियों का शिकार भी है और उन्हीं परिस्थितियों का सबसे बड़ा खिलाड़ी भी। ‘दृश्यम’ की खासियत यही है कि यहाँ कहानी केवल यह नहीं है कि क्या ...