मनीषा कुलश्रेष्ठ का उपन्यास " मल्लिका " की समीक्षा

इति हास में खोयी हुई नारी और ' मल्लिका ' उपन्यास:--- मल्लिका इतिहास की एक ऐसी उपेक्षित महिला है जिसने साहित्य में तो अपना अमूल्य योगदान दिया लेकिन उनके अवदान को किसी हिंदी साहित्य के इतिहासकार ने नहीं समझा। यही कारण है कि हम मल्लिका के बारे में इतिहास के किसी भी पन्ने में नहीं पड़ते हैं। इसी उपेक्षित महिला के महत्व को समकालीन कथा लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ (जो कि अपनी विशेष प्रकार की कथाओं के लिए प्रसिद्ध है) ने उजागर करने का प्रयास किया है। मनीषा कुलश्रेष्ठ जी ने बहुत ही बारीकी से इतिहास को खंगाला है, तत्पश्चात उन्होंने मल्लिका के जीवन को उघाड़ने का प्रयास किया है। "मल्लिका " उपन्यास में लेखिका ग़ल्प तथा कल्पना के पुट से ऐसी रचना का निर्माण किया है जो अतुलनीय है जिसका कोई तोड़ नहीं है। जैसा कि मनीषा जी ने उपन्यास के प्राक्कथन में ही स्पष्ट कर दिया है कि " मल्लिका की कथा ग़लत होते हुए भी ऐसे संपूर्ण व्यक्ति की कहानी है जो हाड़-मांस से बना, किन्हीं बीते वक्तों में भी जीता हुआ, सांस लेता था। उसके होने के अल्प ही सही ओझल ह...